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कुछ लोगो को याद करने का कोई दिन मुकर्रर नहीं होता दिल में जब उदासी हो या मन कुछ अच्छा ना हो तो "रशोकि रमाकु"को याद फ़रमा लीजिए...दार्जिलिंग की वादियों में गुंजती युडलिंग उदास दिल को भरपुर तसल्ली देगी और चेहरे पर मुस्कान डिसकाउंट में मिलेगी।
झुमरु किरदार और किशोर कुमार के व्यक्तित्व में एक ही समानता है फ़क्कडपन और ये स्वभाव बिरले ही लोगो को नसीब होता है तभी तो किशोर कुमार लिखते है "प्यार सीने में है हर किसी के लिए,मुझको प्यारा हर इंसान दिल वालो पे हुं कुरबान जिंदगी है मेरी जिंदगी के लिए"...फ़क्कड बन के घुमरु....."
मधुबाला और किशोर कुमार प्रेम पुर्ण संबंधो की एक भरी पुरी रील है फ़िल्म "झुमरु"।
कहानी एक बंजारे झुमरु(किशोर कुमार) और अंजना(मधुबाला) की है जिनका प्यार उंच नीच की सरहदो को पार करता है। अंजना संपन्न परिवार की बेटी है और शहर से गांव अपने पिता के पास कई सालो बाद अती है।वो अपने पिता को काफ़ी बदला महसुस करती है जिनका कि गांव वालों के प्रति रवैया काफ़ी सख्त और क्रुरता भरा है।हालांकि फ़िल्म की प्रस्तुती इतनी प्रभावशाली नहीं है लेकिन किशोर-मधुबाला की रोमांटिक जोडी ,किशोर दा की निर्माता,अदाकार,संगीतकार और गीतकार के रुप में उपस्थिति इस फ़िल्म में जान डाल देती है।जब किशोर दा गाते है ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी ए मेरे दिल सुना कोई कहानी .......बरबस ठंड के वो दिन याद आ जाते है जब रेडियों सिलोन पर ये गाना ट्युन कर सुनने की कोशिश करते थे। असल में एक और जिंदगी ट्युन हो रही थी जब मधुबाला और किशोर कुमार की नजदीकिया बढ रही थी तब ही मधुबाला गंभीर दिल की बीमारी की चपेट में आ गई दोनो के घर वाले इस अंर्तजातिय विवाह के लिए तैयार नहीं थे,आखिरकार दोनो विवाह संस्कार में बंधे और ये साथ 1969 तक रहा और मधुबाला ने अलविदा कहा।बहरहाल जब अंजना के पिता को झुमरु से प्रेम संबंधो का पता चलता है तो वो उसकी शादी अपने मैनेजर रमेश(अनुप कुमार) से करने की घोषणा कर देते है।किशोर दा की गंभीरता को नजदीक से महसुस करना हो तो ये गाना सुनिये"कोई हमदम ना रहा कोई सहारा ना रहा.."कमाल की बात तो ये है कि उनके बडे भाई अशोक कुमार ने उन्हे ये गाना गाने के लिए मना किया था कि ये गाना उंचे सुर में है और तुम्हारे बस की बात नहीं,लेकिन आखिर थे तो वे किशोर कुमार। उन्होने ने राग झिंझोटी में ये गाना गाया और ऐसा गाया कि आज भी गुनगुनाया जाता है।लेकिन इस गाने के पीछे की कहानी ये है कि मुलत:ये गाना भारतीय फ़िल्म की पहली महिला संगीतकार सरस्वती देवी(खोर्शीद मिनोचर होमजी) ने बाम्बे टाकिज की फ़िल्म जीवन नैया(1934) के लिए बनाया था जिसे अशोक कुमार ने अपनी आवाज में गाया था उस समय किशोर कुमार महज ६ वर्ष के रहे होंगे।लेकिन इतने सालो बाद कही ये गाना अवचेतन में रहा और उन्होने इसका मुखडा जस का तस उठाकर अपनी अदा में इसे गाया।लेकिन फ़िल्म इंडस्ट्रीज में ये अक्सर होता है इसका क्रेडिट सरस्वती देवी को कभी नहीं मिला। लेकिन झुमरु फ़िल्म खुब चली और गाने भी,जैसा कि फ़िल्म में होता है कि अंजना को पता चलता है कि झुमरु की मां उसकी असल मां है तो फ़िर झुमरु कौन है.....अब ये तो फ़िल्म देखने पर ही पता चलेगा ना....।
विशेष:किशोर कुमार ने गाने में "युडलिंग" का प्रयोग कर सीधे सपाट गानो के दौर में एक नई उर्जा भर दी लेकिन आज तक उनके गले की हरकत को कोई पकड नहीं पाया।
फ़िल्म- झुमरु 1961
निर्माता-अनुप शर्मा
निर्देशक:शंकर मुखर्जी
गीत: मजरुह सुल्तानपुरी,किशोर कुमार
संगीत:किशोर कुमार
गीत:
ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी-किशोर कुमार
मैं हुं झुम झुम झुमरु...-किशोर कुमार(गीत-किशोर कुमार)
कोई हमदम ना रहा कोई सहारा ना रहा-किशोर कुमार
मतवाले हम मतवाले तुम-किशोर कुमार
बाबु आना सुनाते जाना-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
हे झुमे रे झुमे रे दिल मेरा-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
आजा तु आजा....किशोर कुमार,उषा मंगेशकर
ऐ भोला भाला मन मेरा-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
ऐ बाबा लु बाबा लु-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
टिंबक टु काठमांडु-किशोर कुमार(गीत-किशोर कुमार)
रुक रुक थाम थाम धीरे चल -आशा भोंसले(गीत-किशोर कुमार)
-योगेन्द्र व्यास
झुमरु किरदार और किशोर कुमार के व्यक्तित्व में एक ही समानता है फ़क्कडपन और ये स्वभाव बिरले ही लोगो को नसीब होता है तभी तो किशोर कुमार लिखते है "प्यार सीने में है हर किसी के लिए,मुझको प्यारा हर इंसान दिल वालो पे हुं कुरबान जिंदगी है मेरी जिंदगी के लिए"...फ़क्कड बन के घुमरु....."
मधुबाला और किशोर कुमार प्रेम पुर्ण संबंधो की एक भरी पुरी रील है फ़िल्म "झुमरु"।
कहानी एक बंजारे झुमरु(किशोर कुमार) और अंजना(मधुबाला) की है जिनका प्यार उंच नीच की सरहदो को पार करता है। अंजना संपन्न परिवार की बेटी है और शहर से गांव अपने पिता के पास कई सालो बाद अती है।वो अपने पिता को काफ़ी बदला महसुस करती है जिनका कि गांव वालों के प्रति रवैया काफ़ी सख्त और क्रुरता भरा है।हालांकि फ़िल्म की प्रस्तुती इतनी प्रभावशाली नहीं है लेकिन किशोर-मधुबाला की रोमांटिक जोडी ,किशोर दा की निर्माता,अदाकार,संगीतकार और गीतकार के रुप में उपस्थिति इस फ़िल्म में जान डाल देती है।जब किशोर दा गाते है ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी ए मेरे दिल सुना कोई कहानी .......बरबस ठंड के वो दिन याद आ जाते है जब रेडियों सिलोन पर ये गाना ट्युन कर सुनने की कोशिश करते थे। असल में एक और जिंदगी ट्युन हो रही थी जब मधुबाला और किशोर कुमार की नजदीकिया बढ रही थी तब ही मधुबाला गंभीर दिल की बीमारी की चपेट में आ गई दोनो के घर वाले इस अंर्तजातिय विवाह के लिए तैयार नहीं थे,आखिरकार दोनो विवाह संस्कार में बंधे और ये साथ 1969 तक रहा और मधुबाला ने अलविदा कहा।बहरहाल जब अंजना के पिता को झुमरु से प्रेम संबंधो का पता चलता है तो वो उसकी शादी अपने मैनेजर रमेश(अनुप कुमार) से करने की घोषणा कर देते है।किशोर दा की गंभीरता को नजदीक से महसुस करना हो तो ये गाना सुनिये"कोई हमदम ना रहा कोई सहारा ना रहा.."कमाल की बात तो ये है कि उनके बडे भाई अशोक कुमार ने उन्हे ये गाना गाने के लिए मना किया था कि ये गाना उंचे सुर में है और तुम्हारे बस की बात नहीं,लेकिन आखिर थे तो वे किशोर कुमार। उन्होने ने राग झिंझोटी में ये गाना गाया और ऐसा गाया कि आज भी गुनगुनाया जाता है।लेकिन इस गाने के पीछे की कहानी ये है कि मुलत:ये गाना भारतीय फ़िल्म की पहली महिला संगीतकार सरस्वती देवी(खोर्शीद मिनोचर होमजी) ने बाम्बे टाकिज की फ़िल्म जीवन नैया(1934) के लिए बनाया था जिसे अशोक कुमार ने अपनी आवाज में गाया था उस समय किशोर कुमार महज ६ वर्ष के रहे होंगे।लेकिन इतने सालो बाद कही ये गाना अवचेतन में रहा और उन्होने इसका मुखडा जस का तस उठाकर अपनी अदा में इसे गाया।लेकिन फ़िल्म इंडस्ट्रीज में ये अक्सर होता है इसका क्रेडिट सरस्वती देवी को कभी नहीं मिला। लेकिन झुमरु फ़िल्म खुब चली और गाने भी,जैसा कि फ़िल्म में होता है कि अंजना को पता चलता है कि झुमरु की मां उसकी असल मां है तो फ़िर झुमरु कौन है.....अब ये तो फ़िल्म देखने पर ही पता चलेगा ना....।
विशेष:किशोर कुमार ने गाने में "युडलिंग" का प्रयोग कर सीधे सपाट गानो के दौर में एक नई उर्जा भर दी लेकिन आज तक उनके गले की हरकत को कोई पकड नहीं पाया।
फ़िल्म- झुमरु 1961
निर्माता-अनुप शर्मा
निर्देशक:शंकर मुखर्जी
गीत: मजरुह सुल्तानपुरी,किशोर कुमार
संगीत:किशोर कुमार
गीत:
ठंडी हवा ये चांदनी सुहानी-किशोर कुमार
मैं हुं झुम झुम झुमरु...-किशोर कुमार(गीत-किशोर कुमार)
कोई हमदम ना रहा कोई सहारा ना रहा-किशोर कुमार
मतवाले हम मतवाले तुम-किशोर कुमार
बाबु आना सुनाते जाना-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
हे झुमे रे झुमे रे दिल मेरा-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
आजा तु आजा....किशोर कुमार,उषा मंगेशकर
ऐ भोला भाला मन मेरा-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
ऐ बाबा लु बाबा लु-किशोर कुमार,आशा भॊंसले
टिंबक टु काठमांडु-किशोर कुमार(गीत-किशोर कुमार)
रुक रुक थाम थाम धीरे चल -आशा भोंसले(गीत-किशोर कुमार)
-योगेन्द्र व्यास
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