Friday, June 2, 2017

ऐ री पवन......

ऐ री पवन...... लता जी के अपर नोट  से लोअर नोट पर सुगम आवाजाही इस गाने की खुबसुरती बयां करने के लिए काफी है।

किसी सामान्य गायक के लिए ये गाना निभाना थोड़ा कठिन है और उस पर पंचम की संगीत पच्चीकारी ,तबले का सिंपल ठेका जिसमे कांगो का बेस मिक्स और मादल की उसी सुर में टुंग की ध्वनि।  इस गाने का कुल जमा रिदम सेक्शन है।

वायलिन का पुरे समय मीठा बेक ग्राउंड गाने के भराव को पूर्ण करता है।इंटरल्यूड में सन्तूर के साथ गिटार की स्ट्रिंग का मिक्सिंग है वो मुझे खासियत लगती है जो अमूमन साधारणतया सुनने में पता नहीं लगती। और शब्दों की गुथावन में गुलज़ारियत सी  महक आती है। 

 लेकिन गाना आनंद बख्शी साहब  ने  ऐसे लिखा मानो पवन कोई बावरी संगी सखी सहेली है जिसे दुःख दर्द बांटने और बतियाने का कोई बहाना मिल गया हो।लेकिन एक बात और गौर करने लायक है कि  हिंदी शब्दावली में पवन पुर्लिंग शब्द है लेकिन बख्शी साहब ने उसे स्त्रीलिंग में ढाल दिया और एक खुबसूरत गीत रच दिया।। कुछ कमाल खोजो तो मिल ही जाते है।ट्रेन के सफर में कुछ टाइम मिला तो कुछ लिख पा लिया।

https://www.youtube.com/watch?v=Cu2zpXIBWKI

No comments:

Post a Comment

https://www.facebook.com/sunil.joshi.10888/videos/2237571532949932/