सीधा होना बड़ी जिम्मेदारी और जोखिम भरा होता है । कुछ लोग तो शक्ल से सीधे
दिखते है, तो कुछ सीधे होने
का नाटक करते है, तो कुछ बेचारे जनम
से सीधे घोषित कर दिए जाते है जैसे कि मैं ।
सीधा होना एक ऐसी त्रासदी है जो ज़िंदगी भर आपका पीछा नहीं छोड़ती। ये एक ऐसा
अभिशाप है जो आपकी उद्दंडता को बाहर नहीं आने देता। अब बचपन से सुनता आया की अरे
ये तो चार भाइयो मे सबसे सीधा है। और वही से शुरू हो गई थी अपने सीधेपन की शुरुआत। जैसे किसी बच्चे को बचपन से ही संत बनाने का उपक्रम चालू कर देते है उसी तरह
एक बच्चे को सीधा बनाने का क्रम चालू हो जाता है। अब आप बताओ कि यदि मैं बचपन में
ज्यादा रोया नहीं तो इसका मतलब ये कि मैं बहुत सीधा हूँ । मां भी बड़े चाव से सबके
सामने कहती अरे पता है ये हमारा तो गुड्डु सबसे सीधा है अरे पैदा हुआ तब भी
ज्यादा नहीं रोया। अरे ये हमारा सबसे सीधा
बच्चा है, बिलकुल भी जिद नहीं
करता, अरे ये तो बेचारा सब खा लेता है
। अब आप ही बताओ ये क्या बात हुई । इस चक्कर में कई बार मन को मारना पढ़ा । अब
बालमन में जिस चीज कि इच्छा थी वो सीधेपन ने छिन ली। ये सुनते-सुनते थोड़ा समझने लायक हुआ तो लगा कि
अपन सीधे है इसलिए रोना नही है, जिद नहीं करना है, शरारत नहीं करना है क्योकि अपन तो सीधे है । जब भी कोई बोलता कि अरे आपका
बच्चा तो बहुत सीधा है तो शर्माने का उपक्रम कर अपनी इस पैदायशी प्रतिभा पर गर्व होने लगा ।
कई बार शरारत करने का मन किया फिर अंदर से आवाज आई अरे तू तो सीधा है। इस तरह
दोस्तो और भाइयो मै नामकरण कुछ यूं भी हुआ कि अरे ये तो गेल्या है। तो इस तरह धीरे धीरे सीधे पन का रंग चढ़ता गया ।
फिर भी मन इसी उधेड़ बुन मे रहता कि आखिर सीधा रहने के प्रोटोकाल क्या है -तो ये जाना कि इसके कई प्राररूप है जैसे -कई
लोग सीधे को गमना, बेवकूफ या ऐसा
व्यक्ति जिसके भाव शून्य हो वो सीधा होता है ।
अब साहब हालात ये थे कि मुहल्ले कि सारी मम्मियाँ अपनी बेटीयो को मेरे साथ ये
सोच कर भेज देती कि अरे ये तो सीधा है अब आप सोचिए सीधेपन का कितना बोझ की आपको
शुगर नहीं है फिर भी मिठाई नहीं छु सकते ।
कहावत है सीधे को तेज ही मिलती है शादी के पहले लड़की वालो ने तो भाँप ही लिया की लड़का सीधा है ठीक ठाक कमा लेता है। लड़का सीधा है अपने कब्जे मे रहेगा लड़की सुखी
रहेगी ।सीधा होना तो जैसे अघोषित भीष्म प्रतिज्ञा हो गई।
तो साहब सीधेपन मे शादी हो गई और सीधेपन मे बच्चे भी हो गए।
अब कोई चेहरा देखकर सीधा कहता है तो कोई व्यवहार देख कर। जिस बीबी ने सीधा
देखर शादी की अब कहती है थोड़ा चंट बनो चंट,
कोई भी तुम्हें बेवकूफ बना जाता है। बच्चे बोलते है पापा आप बहुत सीधे हो आप
चौकीदार को डांटो वो 15 दिन बाद ड्यूटी पर आया है । अब मै उनको क्या बताता कि
तुम्हारी मम्मी ने डांटा था तो आ नहीं रहा था अब मैंने समझाया तो आज आ गया।
जब जाब के लिए इंटरव्यू दिया तो बॉस बोला कि हमें आप जैसे सरल और ईमानदार लोग
चाहिए और आपको देखकर लगता है कि आप इस जाब के लायक है। अब वही बॉस प्रमोशन नहीं करता कि-अरे तुम
बहुत सीधे हो हमे थोड़े चालू लोग चाहिए अब
बताओ क्या करे।
लेकिन ठीक है साहब सीधेपन के संस्कार मे
ये फायदा हुआ कि खामोशी के आलम मे व्यावहारिकता की समझ आ गई,लोगो
को समझने और पढ़ने का अनुभव आ गया । सही और गलत का
फैसला लेने की समझ आ गई । ये समझ आ
गया कि वाचालता से खामोशी अच्छी । सीधेपन में ज्यादा दोस्त ना बने लेकिन दुश्मन
भी कोई नहीं बना। अब सीधे पन की फाँस नहीं
चुभती क्योकि अब मन सीधा है, शांत है । चूँकि मन
सीधा है तो अब सीधे पन अपना आनंद है।
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