Sunday, March 10, 2013

जागो सोने वालो.....सुनो मेरी कहानी: भुत बंगला

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सौ वर्ष के भारतीय फ़िल्म ब्रम्हाण्ड की सैर करे तो हजारों वर्ष भी कम पड जाएंगे- अनगिनत सफ़लताएं-असफ़लताएं,किस्मत-बदकिस्मती,बुलंदियां-बदहाली,खुशी-अवसाद,सुरीलापन-बेसुरापन,बेशुमार कालजयी हुनरमंद कलाकारो की एक पुरी आकाश गंगा,जीवित एवं अजीवित किवदंतियां।सतत चलायमान ये फ़िल्मी दुनिया सफ़ेद पर्दे पर अपना रुपहला सफ़र तय करती रहेगी जब तक कि कोई सुरज अपनी किरणॊ को समेट ना लें।
तो चलिए आज की सैर भुत बंगले पर कर आते है।इसी फ़िल्मी ब्रम्हाण्ड के एक सितारे मेहमुद जिन्होने विषम परिस्थितियों में कई असफ़लताओं को एक साथ जिया,बहके कदमो को संभाला और एक और असफ़ल फ़िल्म अपने भाई उस्मान अली के साथ मिल कर बनाई।बात असफ़लता की नहीं हिम्मत की है जब साठ के द्शक में फ़िल्मे एक से बढ कर एक टिकिट खिडकियों पर अपने रिकार्ड तोड रही थी ऐसे में भुत बंगला जैसी फ़िल्म बनाना वाकई साहस का काम ही कहा जाएगा। एक तो मर्डर मिस्ट्री उपर से फ़िल्म को सेंसर बोर्ड से ए-सर्टिफ़िकेट मिलना पुरी फ़िल्म पर ग्रहण ही कहा जा सकता है।फ़िल्म में कुछ खिंचाव था तो मेहमुद और पंचम की कामेडी।इस फ़िल्म में पंचम ने पहली और आखिरी बार फ़िल्म में अभिनय किया लेकिन जो भी किया अद-"भुत" ही था।फ़िल्म में नुकसान ना हो इसलिए मेहमुद कि बहन मीनु मुमताज ने अपना पहला बच्चा तक कोख में आते ही उसे जन्म ना देने का निर्णय लिया।ऐसे में जब फ़िल्म कुछ कमाल ना कर पाए तो क्या स्थिति पैदा होती होगी, लेकिन ये फ़िल्मी दुनिया दिल और दिमाग दोनो की मजबुती मांगती है।इस फ़िल्म में किशोर कुमार और पंचम ने पहली बार साथ काम किया और वो गाना बनाया जो आज भी गुनगुनाया जाता है.."जागो सोने वालो सुनो मेरी कहानी." मन्ना डे से "आओ ट्विस्ट करे" जैसा गाना गवा लिया ये गाना बिनाका गीत माला की दुसरी पायदान पर खुब बजा और लता जी से बेहद एक सुंदर गीत "ओ मेरे प्यार आजा"जो कि बेहद करीने से तैयार किया लगता है।
लेकिन उस समय मिडिया छब्बीस वर्षीय पंचम से बहुत सख्ती से पेश आया उसने छोटॆ नवाब और भुतबंगला की जम कर खिंचाई की। लेकिन जब आज इन गानो के नोट्स और आर्केस्ट्राइजेशन को सुनते है तो उनकी थाप बाद के दशको में सुनाई देती है।क्या ही अजीब बात है जिस भुतबंगला मर्डर मिस्ट्री ने पंचम के संगीत को नकारा वही "तीसरी मंजिल" की मर्डर मिस्ट्री ने पंचम को सातवे आसमान पर पहुंचा दिया।
अरे!फ़िल्म की कहानी पर तो बात ही नहीं की...चलिए संक्षेप में कहानी युं है कि अमीर सेठ कुंदनलाल का बंगले कत्ल हो जाता है और उसकी बीबी और बच्चा डर कर कही चले जाते है।पचास साल बाद उसी बंगले में कुंदनलाल के तीन भतीजे श्यामलाल(नासीर हुसैन),रामलाल(नाना पलसीकर) और रामु रहते है।रामलाल की बेटी रेखा(तनुजा) जिस दिन लंदन से आने वाली होती है उसी दिन रामलाल की कार एक्सीडेंट में मौत हो जाती है और उसी रात को रामु का भी कत्ल हो जाता है।ऐसे में मोहन(मेहमुद) जो कि युथ क्लब का सदस्य है और उनकी पुरी टीम है रेखा की मदद करती है।मोहन और रेखा की मोहब्बत और कौन रेखा को भी मारना चाहता है,पिछले कत्लो का कातिल कौन हो सकता है?ये जानना हो तो फ़िल्म तो देखनी पडेगी ना।क्या पंचम और मेहमुद को गाते और खाते भुत बंगले में नहीं देखिएगा क्या?
विशेष: भुत बंगला से मेहमुद ने पहली बार निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा।इस फ़िल्म में दुबले पतले अमीन सयानी को अपनी मोहक आवाज के साथ देखना सुखद है।
फ़िल्म: भुत बंगला(1965)
निर्माता: उस्मान अली
निर्देशक: मेहमुद
गीत: महरुह सुल्तानपुरी
संगीत: आर.डी.बर्मन
लेखक एवं संवाद: अख्तर-उल-इमान
गीत:
1.ओ मेरे प्यार आजा -लता मंगेशकर
2.जागो सोने वालो-किशोर कुमार
3.प्यार करता जा-मन्ना डे
4.आओ ट्विस्ट करे-मन्ना डे
5.भुत-बंगला-मेहमुद,आर.डी.बर्मन,सुरेश


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