Monday, November 5, 2012
गीत जिन्हे मन गाये(चौथी किश्त):इस जिंदगी का शुक्रिया......सदके में उपर वाले.......
मजरुह सा. ने क्या खुब लिखा "ये जिंदगी दर्द भी है,ये जिंदगी है दवा भी.दिल तोडना ही ना जाने ,जाने ये दिल जोडना भी.इस जिंदगी का शुक्रिया......सदके में उपर वाले....
जिंदगी को सकारात्मक नजरिये से देखे तो ये गाना सीधा दिल में उतर जाता है....और पंचम दा ने तो पियानो का तकिया बना कर सिरहाने रख दिया है ऐसा लगता है मानो उगलिया पियानो पर नहीं जहन में दौड रही है,पियानो काड के साथ जब ड्र्म-ब्रास प्लेट(cymber) पर हल्की-हल्की स्टीक की थाप लगती है और फ़िर सधा ड्र्म और कांगो की बीट के साथ किशोर दा गाने का युं आगाज करते है कि-" जीवन के दिन छोटे सही हम भी बडे दिल वाले....कल की हमें फ़ुरसत कहा......" पंचम दा कि खासियत है कि वे रिदमिक परक्युजन का इस्तेमाल बहुत उम्दा तरीके से करते है....इसकी चर्चा आगे की किश्तो में हम करेगे....अभी तो बस आपको कुछ नहीं करना है बस आंखे बंद कर किशोर दा की आवाज का जादु छाने देना है बस.आप सभी ने मुझे जन्म दिन पर आत्मीय संदेश भेजे है मैं सभी के प्रति ह्रदयानव्त कृतज्ञ हुं और आप के लिए मेरी और से ये ईयर ड्राप भेंट......
टीप:किसी भी गाने में रिदमिक परक्युजन का लुत्फ़ लेना हो तो हेड्फ़ोन लगाकर या कम से कम 2000 वाट स्पीकर पर सुने और बस विडियो ना देखे वरना गाने का मजा जाता रहेगा.
(यह गाना लताजी के वर्जन में भी उम्दा बन पडा है.......)
http://youtu.be/GlrKedrn574
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