Monday, November 5, 2012
गीत जिन्हे मन गाये (छ्ठी किश्त):दिल ने पुकारा तुम्हे........ यादों के परदेस से........"
जब कोई आलाप की कशिश हवाओ पर तैरती हुयी आपके कानो में ये कहे कि सावन आ गया है और ये बुंदे थामे नहीं थम रही अब तो आ जाओं......कि-"दिल ने पुकारा तुम्हे यादों के परदेस से........" गाना खत्म होते-होते सुनने वाले खुद विरह पीडा को अपने अंदर महसुस करने लगे तो ये कमाल उस आवाज का ही होगा जो बरसो बरस हमारे दिल में युं ही बरसती रहेगी.बारिश की द्स्तक है और मन बैचेन अपने मन को इस गीत की फ़ुहरो से त्रप्त कीजिए और खो जाइए ....राग पहाडी में स्वर बध्द पंचम की धुन,लताजी की मिठास और आनंद बक्ख्शीजी की कलम जादुगरी....सितार - संतुर साज का लुभावन तालमेल एवं रुपक ताल का सीधा-सीधा ठेका, आखरी अंतरे में वायलिन का विरह टुकडा इस गीत की मीठास को दुगना कर जाता है....तो लगाइये हेड-फ़ोन आंख बंद कीजिए और डुब जाइए "सावन के झुले पडे.......तुम चले आओ".
टीप:एल.पी. रेकार्ड पर सरसराती निडिल जब प्लेयर डीश को चुमती है और जो आवाज फ़ुटती है सच मानिये एल.पी. रेकार्ड पर गाना सुनना ठीक वैसा ही है जैसे कुल्हड में चाय पीना........"अब वो दिन कहां"........
जुर्माना(१९७९)
Link -http://youtu.be/JCywlvM4Ark
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