Monday, November 5, 2012

गीत जिन्हे मन गाये (तीसरी किश्त):बे-करारी में है करार ....क्या कीजे...


आ गया जो किसी पे प्यार क्या कीजे....प्रथम 9 सेकण्ड में ही आप इस गाने की गिरफ़्त में हो चुके होते हैं ....इसे गायिका और संगीतकार की खुबसुरत साजिश करार दे सकते है.पियानो की काड के साथ ही लताजी का मात्र नौ सेकण्ड का आलाप और फ़िर अंजान के शब्दो का रोमांटिक सफ़र......,जो गीतकार शब्दों के साथ प्रणय करना जानता हो....और शब्दो को लपॆट कर रातो को सोता हो वो ही ये बात कह सकता है -"दिल तो है दिल...दिल का एतबार क्या कीजे"वैसे तो इस गाने का बेस पियानो है लेकिन कल्याण जी-आनंद जी ने इसे कही भी लाउड नहीं होने दिया है-कही कोई कलात्मक पीसेस नहीं है.शायद ऐसा इसलिए कि-जब प्यार का डंक जब पहली बार लगता है तो उसे साफ़ मन से सीधा-सीधा कैसे कहा जाए इसलिए संगीतकार ने पुरा मैदान लता जी के लिए छोड दिया है,मात्र दो अंतरे वाले इस गाने में सारा नवजात प्यार "कीजे" शब्द पर लुटा दिया है और ये ही पुरे गाने की जान है.गाने की हर लाईन पर लता जी को स्ट्रींग मिलती है और बेक ग्राउंड में सधी हुयी रिदम जो गाने की नजाकत और बढा देती है.गाने की ताकत ही वही है जिसमें सुनने वाला अकस्मात फ़िसलकर अपने आप को उसी धारा के हवाले कर दे......गाना खत्म होने के बाद सचमुच में दिल के किसी कोने में कहीं कसक सी महसुस होती है .....क्योsss जी... इसीलिए तो रिवाइंड कर गाना फ़िर से सुन रहे है ना.....सच बताइयेगा.....काश लाइफ़ में भी ऐसा कोई रिवाइंड बटन होता....हम उन लम्हो को फ़िर से जी लेते.....कोई बात नहीं ये गाने है न हमारी जिंदगी में जो उन पलों को सामने ले आते है जिन्हे हमने वक्त की गर्त में कहीं छोड दिया होता है........"बस ना चले रे शाम सवेरे लेके तेरा नाम....."
टीप:गाने की आत्मा में उतरने के लिए विडियो ना देखे तो बेहतर होगा....बस आंखे बंद कर अपनी इमेजेस खुद गडे....ये ही आपका उम्दा छायांकन होगा...... अगले गाने के साथ शीघ्र ही.......
http://youtu.be/b_DYY5zZdvs

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