Monday, November 5, 2012

गीत जिन्हे मन गाये(नौंवी किश्त):सर्दी में जब पियोगे यारोssss.....


गरम कोट बन जाएगा".....एक नायाब गीत हाथ लगा है, एक आम आदमी जीवन की फ़िलोसाफ़ी को "मधुशाला" पढ कर समझ ही नहीं सकता उसे तो बस देशी भाषा में जिंदगी का वो फ़साना सुनाना जो सीधे दिल में धंस कर ड्बड्बाई आंखो से झुमने पर मजबुर कर दे.....ये गाना एक निपट आम आदमी की मधुशाला है और अमित खन्ना ने महज ६ मिनिट १९ सेकण्ड में पुरी मधुशाला को एक ग्लास में उतार कर फ़िर से जी लेने के लिए झुमा देता है......इस गाने का आडियो जब सुना तो लगा बहुत दम है इस गाने में लेकिन  मलाल सिर्फ़ ये है कि इसका पिक्चराइजेशन गाने की आत्मा को नहीं छु सका.
ये राजेश रोशन और किशोर दा के बस में ही है कि उन्होने इस गाने में वो सारे सुख-दुख के  रंग डाले है जिन्हे पीकर इंसान सिर्फ़ और सिर्फ़ झुम ही सकता है.....पुरा गाना वायलिन के पुरे हुजुम पर ही तैरता रहता है..., मेंडोलिन के पिसेस जीने 
की आस को थामे रहते है.... रिदम सेक्शन और परक्युजन का अदभुत तालमेल पांव की थिरकन को बनाए रखता है-वही ट्र्म्पेट एक सकारात्मक सोच का आगाज करता रहता है.....इन साजों की ये ही तो खासियत है.....किशोर दा के साथ इस गाने की अंतिम बुंद तक आप पुरा मजा ले सकते है......बस...तु पी और जी.....
टीप: ठंड है -तो मौका और दस्तुर दोनो.... केम्फ़ायर कीजिये इस गाने का आडियो लगाइए....झुम जाइए.......(झुमने के लिए मदिरा नहीं....इन फ़िजाओं में ही नशा भरपुर है......)
 Film: Desh pardesh 1978
http://ww.smashits.com/des-pardes/tu-pee-aur-jee/song-35173.html

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