Monday, November 5, 2012
गीत जिन्हे मन गाये (पांचवी किश्त) :गम जहां सोये...... और खुशी जागे
एक बार पुन: -बाल-दिवस पर ये गाना हम सभी बच्चों के लिए...........
कई बार ऐसा होता है कि जिंदगी हमें जहां ले जाना चाहती है...हम उस ओर देखते भी नहीं और इस तरह कुछ कोमल लम्हे एक पत्ते की तरह आपकी राह तकते धीरे से अपनी शाख से टुट कर विदा हो जाते है.यदि कुछ पल आपसे कहे कि आओ 4मिनट.35 से.में चांद की सैर कर आते है तो हर्ज ही क्या है,अपने अति व्यस्त बडप्पन से छोटा समय बचपन के लिए निकाल लेना ये सही मायने में बडप्पन कहलाए शायद.पिछ्ले दिनो बेटी के साथ हास्पिटल में बिताए कुछ लम्हे मुझे उस बचपन तक ले गये जिन्हे बहुत पीछे भुल कर छोड आया था.ये खुबसुरत गाना बच्चो के साथ बच्चा बन कर सुने एक सकुन सा महसुस करेंगे आप.जब लता जी कह रही है कि "आओ तुम्हे चांद पर ले जाए"... तो जाने में कोई हर्ज नहीं है.बप्पी लहरी की कंपोजिशन है लेकिन जाने क्यो पंचम दा की महक आती है और इसी जख्मी (१९७५) फ़िल्म से बप्पी दा को नई पहचान मिली.गौहर कानपुरी के सारे गीत उम्दा है.......लेकिन अभी तो सिर्फ़ ये गाना सुने.
टीप: लता जी को सुनना किसी आशीष से कम नहीं ..कोई बात नहीं गर आप बच्चे नहीं है तो.........
http://ww.smashits.com/zakhmee/aao-tumhen-chand-pe-le-jayen/song-79085.html
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