"सफ़ल होगी तेरी अराधना"
सफ़ल होगी तेरी.....आराधना
"दिया टुटे तो है माटी जले तो ये ज्योति बने,आंसु बहे तो है पानी,रुके तो ये मोती बने,ये मोटी आंखो की पुंजी है ये ना खोए...काहे को रोए...."
जिंदगी को ये नहीं मालुम की सुख क्या है और दु:ख क्या है ये तो इन आंखो का तर्जुबा है कि गम और खुशी की इबारत आंसुओं में घोलकर गालों पर लुढ्का देती है.सचिन देव बर्मन की खासियत ही ये है कि वे पात्रों के दुख में एक बडे बुजुर्ग वार की भुमिका निभाने के लिए तैयार हो जाते है और अपनी गहरी आवाज से वो संबल देते है कि सुनने वाला भी निराशा के बादलो से राहत महसुस करता है।
आपको याद होगा फ़िल्म गाईड में भी सचिन देव बर्मन हताश निराश राजु गाईड को अपनी आवाज से पार ले जाते है "वहां कौन है तेरा मुसाफ़िर....".
शक्ति सामंत का मुख्य ब्रांड है रोमांटिक म्युजिकल हिट फ़िल्म और "आराधना" इस माइने में भी खास है कि इस फ़िल्म से राजेश खन्ना को सुपर स्टार का खिताब मिलने की सुगबुगाहट तेज हुयी,किशोर कुमार के स्वर्णिम भविष्य की पौ फ़टी और बर्मन घराने की फ़ेहरिस्त में एक और उम्दा संगीत का खिताब जुड गया।
अपने पुरे यौवन से दार्जिलिंग की वादियों में भागती टाय ट्रेन और हार्मोनिका का प्रिल्युड किशोर दा की आवाज को उकसाता हुआ"मेरे सपनो की रानी कब आएगी तु..." गुंजता है, और एकार्डियन,गिटार के रोमांटिक लोकोमेटिव इफ़ेक्ट के साथ जब अरुण(राजेशखन्ना) अपनी अदाओं से ट्रेन में बैठी हुयी वंदना(शर्मीला टैगोर) के दिल पर दस्तक देते हुए आने वाले प्यार के लम्हो की एक लम्बी पटरी बिछाते हुए साथ साथ गाते चलते है जिसे शायद उम्र के लम्बे फ़ासलो को तय करते जाना था।इसी गाने में बर्मन दा ने गिटारिस्ट के ठीक से नोट ना लगा पाने की वजह से इस गाने की रिकार्डिंग केंसल कर दी थी जबकि युनिट को शुटिंग के लिए दार्जिलिंग निकलना थ|पंचम ने नजाकत को भांपते हुए भानु गुप्ता के साथ एस.डी. के नोट पर तुरंत धुन तैयार की जिसका इफ़ेक्ट आज भी मधुर एहसास देता है।वंदना और एयरफ़ोर्स आफ़िसर अरुण की नजदीकियां परवान चढती है और यहां एस.डी. फ़िर एक धुन वादियो में बिखरा देते है-"कोरा कागज था मन मेरा"।पहले शक्ति सामंत को इस की धुन बिल्कुल पसंद नहीं थी लेकिन जब केरसी लार्ड ने इकोलेट मशीन से इको इफ़ेक्ट दिया तब वे संतुष्ट हुए।इधर तेज बारिश में वंदना-अरुण की टकराती हुयी सांसे आने वाले कल का पता दे रही थी।जलती आग को हवा देता एकार्डियन का जेस्चर पीस जैसे ही उठता है सेक्साफ़ोन उसी शिद्दत के साथ उसकी धुन से लिपट जाता है और किशोर को कहना पडता है-"रुप तेरा मस्ताना....." सच मानिए दो वाद्यो को रोमांस करते सुनना दिल धडकनों को थामना मुश्किल कर देता है।अरुण वंदना का दैहिक भाषा में बात करना वो भी उस वक्त जब ये सामाजिक मर्यादाओं के अनुरुप नहीं था लेकिन निर्देशक ने इसे फ़िल्माने का निश्चय किया और भारतीय सिनेमा में ये पहला प्रयोग था जिसमें कैमेरा को लगातार घुमाते हुए सिंगल शाट में ये गाना फ़िल्मांकन किया था और इस गाने को एफ़टीआईआई में स्टडी मटेरियल के तौर पर आज भी पढाया जाता है।ये ही नहीं किशोर कुमार को पहला फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड इसी गाने पर मिला।अरुण की अचानक मौत और वदंना की देह में पलता बच्चा,समाज के नियम में बंधी वंदना अपना बच्चा पास होते भी उसे अपना नहीं कह सकती,एक घटना में बच्चे की खतिर 14 साल की जेल और फ़िर 22 साल के हुबहु एयर फ़ोर्स पायलेट सुरज(राजेश खन्ना) खुद के बेटे के रुप में मुलाकात। एक पत्नि- मां, के त्याग,धैर्य,और नियति की कहानी अपने बॆटॆ से सुखद मिलन के रुप में समाप्त होती है और फ़िर आंखो का तर्जुबा कि खुशी के आंसु बह निकलते है। कहानी तो फ़िल्म में देखी जा सकती है लेकिन क्या ये मजेदार बात नहीं कि "रुप तेरा मस्ताना" का तिलस्म मनोहारी सिंग और केरसी लार्ड ने रचा था और चार घंटे में रिकार्डिंग कर वो धुन दे गए कि आज भी मन बिना बारिश के झुम उठता है।क्या ये मजेदार नहीं कि पंचम ने किशोर दा को "रुप तेरा मस्ताना" की धुन में तब्दीली के लिए बर्मन दादा से बात करने के लिए कहा था। क्या ये मजेदार बात नहीं कि सुभाष घई ने इस फ़िल्म में प्रकाश नाम का एक छोटा सा किरदार किया और आज शो मेन सुभाष घई को देखना अदभुत है।क्या ये मजेदार बात नहीं कि शक्तिसामंत ने संगीत देने के लिए पहले शंकर-जयकिशन से संपर्क किया था लेकिन आराधना तो एस.डी.की ही थी ना।वाकई एक सफ़ल फ़िल्म बनाना भी किसी आराधना से कम नहीं।
विशेष: आराधना फ़िल्म मुल रुप से हालीवुड फ़िल्म "टु इच हिज ओन"(1946) से प्रेरित है और दोनो ही फ़िल्म में अभिनेत्री को बेस्ट अवार्ड प्राप्त हुआ।
फ़िल्म: आराधना
वर्ष: 7 नवंबर, 1969
निर्माता:शक्तिसामंत
निर्देशक: शक्ति सामंत
लेखक: सचिन भौमिक
संगीत: एस.डी.बर्मन
गीतकार: आनंद बख्शी
फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड-
बेस्ट फ़िल्म अवार्ड-शक्ति सामंत
बेस्ट नायिका अवार्ड-शर्मिला टैगोर
बेस्ट मेल प्ले बेक सिंगर-किशोर कुमार"रुप तेरा मस्ताना"
गीत:
"रुप तेरा मस्ताना" किशोर कुमार
"बागों में बहार है" मो.रफ़ी, लता मंगेशकर
"चंदा है तु मेरा सुरज है तु" लता मंगेशकर
"मेरे सपनों की रानी" किशोर कुमार
"गुनगुना रहे है भंवरे" मो.रफ़ी, आशा भॊंसले
"कोरा कगज था ये मन मेरा" लता मंगेशकर, किशोर कुमार
"सफ़ल होगी तेरी अराधना" एस.डी.बर्मन
-योगेन्द्र व्यास
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