Saturday, October 13, 2012

पेलवान की शोक सभा ( व्यंग्य )

पेलवान की शोक सभा
जिंदगी में कभी ऐसा अवसर आए कि आपको ऐसी शवयात्रा में शरीक होना पडे और शोक सभा में कुछ बोलना भी पडे तो क्या नजारा बनता है आइए जरा देखे.....।शहर के नामी गिरामी पहलवान भिया असमय चल बसे.....अब भिया चल बसे तो पठ्ठे शवयात्रा की तैयारी में जुटे ..ऐ...गोली,पप्पु,टुड्डा चल एरिया की दुकाने बंद करा...मोहल्ले को भेला कर भिया को शमशान पोचाना है.कुछ तो दुकान बंद कर धीरे से कट लिए बाकी शवयात्रा में धकेल दिए गए.श्मशान पहुंचे पहलवान का अंतिम संस्कार हुआ,तभी भिया के खास पठ्ठे  गोटी-डेंजर को कुछ याद आई वो चिल्ला के बोला..ऐ सब को घेर के शेड में लिया....पेलवान की शोक सभा करनी है........ और वो मास्टर को बोल पेलवान के बारे में बोलेगा...अब कुछ सफ़ेद पोश मन ही मन प्रार्थना कर रहे थे कि हमारा नाम ना ले तो अच्छा .....अब बेचारे मास्टर की आफ़त क्या बोले कैसे बोले.....अब मरता क्या न करता....मास्टर सा. बोले हमारे भैया जी से पहली मुलाकात जब हुयी जब वे अपने बच्चे को परीक्षा दिलाने स्कुल आए,तब उनके हाथ में चाकु और बच्चे के हाथ में कलम पुरी परीक्षा लिखवा के ही उठे....मैं उनके असामयिक निधन पर मैं दुख प्रकट करता हुं और ईश्वर उनके परिवार को दुख सहन करने की शक्ति दे...ओम शांति.अब श्री गोटी जी अपनी भावनाएं प्रकट करेंगे.....अब गोटी-डेंजर के चेहरे पर हवाईयां उड गई ...अभी क्या बोले...अब तक तो दादागिरी की अब भाषण....जैसे तैसे गोटी डेंजर हकलाते हुए बोले ....अब भिया के बारे में क्या बोले भिया तो भिया थे.पेली-पेली बार पेलवान से मुलाकात अंदर(जेल) हुई थी...तीन चार महीने भिया की सेवा की बस तभी से भिया का पठ्ठा बन गिया.पेलवान हमेशा कहते थे अपनी सोच उंची रखो,भिया कहते थे समय बदल रिया है अब अपन को चिंदी चोर जैसे काम नी करना है.भिया ने कित्तो को काम पे लगा दिया कित्ते रोजगार के अवसर खोल दिये पेलवान ने,.. आज सब अपनी रोजी रोटी बढिया कमा रिये है..कोई ह्फ़्ता वसुली में,तो कोई गाडी खडी कराई में,कोई पार्किंग में,कोई प्लाट- मकान कब्जे-खाली कराई में.पेलवान को भण्डारा भोत पसंद था, उनके नेतृत्व में कित्ते ही भण्डारे हमने करे.भिया की सेंटिग उपर से नीचे तक जोर दार थी.पेलवान दो दिन पेले ही केरिये थे कि इस बार पार्षद का चुनाव लडना है और फ़ुल फ़्लेश में पोलीटिस्क में आना है.अब पेलवान तो हमारे बीच नी रिये है पर उनके काम को आगे और बढाना है.पेलवान की स्मृति में उनके तेरवे पर एक विशाल भण्डारे का आयोजन माता रानी के मंदिर में किया जाएगा.अपनी पुरी टीम से निवेदन है कि सब लोग काम पे लग जाए और आप सभी लोग अधिक से अधिक सहयोग कर भण्डारे को सफ़ल बानाएं. अब मैं सोच रहा हुं..... शासन प्रशासन क्या रोजगार के इन कुत्सित अवसरो को कभी समाप्त कर पाएगा या ऐसे ही दादा-पहलवानों की शोक सभाओं में भी जबरजस्ती जाना पडेगा...........!

-योगेन्द्र व्यास

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